नाट्यशाला (संज्ञा)
वह स्थान या घर जहाँ नाटक होता है।
सवाई (संज्ञा)
जयपुर के राजाओं की एक उपाधि।
लतखोर (संज्ञा)
वह व्यक्ति जो प्रायः लात खाता होअर्थात् घुड़की-झिड़की आदि सुनते रहने का अभ्यस्त हो गया हो या जो निर्लज्ज बना रहकर बुरी आदतें न छोड़ता हो या ठीक तरह से काम न करता हो।
बहेलिया (संज्ञा)
छोटे-मोटे पशु-पक्षियों को फँसाने या मारने का काम करने वाला वह व्यक्ति जो उन्हें बेचकर अपनी जीविका का निर्वाह करता है।
मुनक्का (संज्ञा)
एक प्रकार की बड़ी किशमिश।
गोटी (संज्ञा)
पत्थर, मिट्टी, प्लास्टिक आदि का वह छोटा टुकड़ा जिसका उपयोग किसी खेल में होता है।
रंगमंच पट (संज्ञा)
रंगमंच का पर्दा।
बकझक (संज्ञा)
नित्य या बराबर होती रहनेवाली कहा-सुनी या झगड़ा।
पालथी मारकर बैठना (क्रिया)
दाहिने पैर का पंजा बाईं पिंडली के नीचे और बाएँ पैर का पंजा दाहिनी पिंडली के नीचे दबाकर बैठना।
शेषनाग (संज्ञा)
पुराणों के अनुसार हजार फनों वाला वह नाग जिसके फनों पर यह पृथ्वी ठहरी हुई है।